रविवार, 1 सितंबर 2013

केदार का सन्देश                                                                                                                                                              केदारनाथ बाबा क्यूँ रुष्ट हो गए ,अपने भक्तो को क्यूँ जख्म दे गए।
प्रलये के बादलो को क्यूँ तब ही बरसना था ,भक्तो को क्यूँ इतना कथोर्दंड देना था।
प्रलायेकारी नेत्र  खोलने का यही समय पाया ,अपनी पवित्र देश भूमि लाशों का ढेर लगाया
आहत हुए कितने बेक़सूर ,बूढ़े जवान बच्चे,क्यूँ तुम्हे दया नहीं आई सब देख और समझके।
कहते है तुम्हारे दर से झोलियाँ भारती है ,बिन करे ही भक्तों की तकदीरे सवरती है।
आज किस अपराध की सजा दे डाली ,इन मासूमों की ज़िन्दगी नर्क बना डाली।
दुनिया में जो पाप कर रंगरलियाँ मनाते है ,दूसरो के खून से चिराग जलाते है।
क्यूँ तुम्हारी तिरछी नज़र उन पर नहीं पड़ी ,क्यूँ उनकी काली करतूत तुमसे रही छूपी।
अगर मिटाना ही था ओ तो इस भ्रस्ताचार को मिटाते ,गरीबों की पेट की भूख को मिटाते।
इतना सुन बाबा ने नैना खोले ,और आँखों में आसूँ भर कर इंतना ही वो बोले।
चाहता तो यही था दुष्टों को नष्ट करता ,जिस विमान में वो होते उसी को नष्ट करता।
लेकिन सोचता हूँ की इन घटनायों से इंसान सीखे ,दुःख की घडी में एक हो ,ब्राह्त्री भाओं सीखे।
एक दुसरे के दर्द को अपना दर्द बना ले ,दुसरो की मदद को खुद को हाज़िर कर दे।
ये जख्म तो भर जायेंगे ,फिर से चमन में फूल खिल जायेंगे।
गर मन की मैल मिट गयी ,तो घट मे ही केदार दर्शन हो जायेंगे।

2 टिप्‍पणियां:

विभा रानी श्रीवास्तव ने कहा…

मंगलवार 03/09/2013 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
आप भी एक नज़र देखें
धन्यवाद .... आभार ....

सुनीता अग्रवाल "नेह" ने कहा…

मार्मिक घटना पर आपकी ये प्रस्तुति ..शिव जी से सवाल और उन सवालों के जवाब .. दिल में उतर गए .. स्वद्नाहीन युग में सायद भगवान् भी संवेदन हीन हो रहे है .. एक नयी विचारधारा ..बधाई :)