मंगलवार, 27 अगस्त 2013

sawan or teej

तीज 
फिर आया  वो  सावन  सुहाना 
जिसकी यादे  मुश्किल  है   भुलाना 
पेडो पे झुले 
उन्हें केसे भूले 
अम्बर के बदरा 
नेनो मैं कजरा 
चहु ओर   हरियाली 
 
बालाओ  की चुनरी गोटे वाली 
माटी में फूटे बीज 
लो फिर आगयी तीज ,
हाथ वो मेह्न्दीवाले ,
सावन के गीत वो निराले ,
आज  
सावन तो है नहीं है झूले ,
बालाओं ने जींस टॉप है पहना 
उनके पास नहीं चुनरी और लहंगा ,
हाथो में ना मेहँदी ना चूड़ी  
कॆसे याद रहे उन्हें ये तीज 
टेंसन ही बन गई अब तो प्रीत 
केसे गुनगुनाये सावन के गीत 
अब तो सावन कब आता है 
बस इन्क्रीमेंट 
 का महिना याद रहा जाता है